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यूपी की सरकारी पॉलीटेक्निक का बुरा हाल,12 को एआईसीटीई का नोटिस

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प्राइवेट पॉलीटेक्निक के बाद अब सरकारी पॉलीटेक्निक का भी बुरा हाल है, बच्चों के साथ खिलवाड़ का खुलासा होने पर एआईसीटीई ने उत्तर प्रदेश,उत्तराखंड और बिहार के 23 सरकारी पॉलीटेक्निक को 2020-21 में प्रवेश न लेने का नोटिस दिया है। चार साल बीतने के बाद भी ज्यादातर पॉलीटेक्निक का परिसर शिफ्ट नहीं हुआ है।पॉलीटेक्निक को गेस्ट फैकल्टी के भरोसे चलाया जा रहा है । सात फरवरी तक अपील का मौका दिया गया है।

पॉलीटेक्निक की पढ़ाई में गुणवत्ता और अन्य अव्यवस्था को दूर करने की कवायद चल रही है। यूपी की 12, उत्तराखंड की 10 और बिहार के एक पॉलीटेक्निक को अव्यवस्था सुधारने का नोटिस मिला है। एआईसीटीई के रीजनल आफिसर डॉ. मनोज तिवारी ने बताया कि गेस्ट फैकल्टी के भरोसे पॉलीटेक्निक नहीं चल सकते हैं। चार साल से ज्यादा दूसरे परिसर में पॉलीटेक्निक नहीं चल सकती हैं। आधे से ज्यादा दूसरे परिसरों में चल रहे हैं।

जहाँ देश में पॉलीटेक्निक और बहुत सारे सरकारी सरकारी स्कूलों, कॉलेजों , विश्वविद्यालयों , और अस्पतालों की ये हालत है वहीँ देश की सरकारों/राजनेताओं/राजनैतिक पार्टियों में मूर्तियां/स्मारक बनाने की होड़ लगी हुई है, आपको बता दें की देश की केंद्र सरकार ने १ साल पहले गुजरात में लगभग 3300 करोड़ रूपये खर्च करके "स्टेचू ऑफ़ यूनिटी" स्वर्गीय श्री सरदार पटेल जी के नाम पर बनाई। 

वहीँ अब महाराष्ट्र की नवनिर्मित (कांग्रेस +शिवसेना) सरकार स्वर्गीय श्री शिवजी महाराज और डॉ. भीमराव आंबेडकर जी के नाम पर 5000 करोड़ में मूर्ति/स्मारक बनाने जा रही है। 

देश की जनता  इन सरकारों/राजनैतिक पार्टियों/राजनेताओं से सवाल जरूर करना चाहिए की क्या उन्होंने आज तक इतने बड़े बजट में देश के भीतर कोई स्कूल /कॉलेज/यूनिवर्सिटी/अस्पताल/या कोई रिसर्च सेंटर बनवाया है? और क्या देश/समाज की जनता का इतना पैसा खर्च करके बनायीं मूर्ति/स्मारक से प्रगति संभव है। 

यूपी: महिला टीचरों को दी गई दुल्हन सजाने की जिम्मेदारी

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उत्तर प्रदेश में अभी तक शिक्षकों की जनगणना और चुनावों जैसे कार्यक्रमों में ड्यूटी की बात हम सुनते आएं हैं लेकिन मंगलवार को होने वाले सामूहिक विवाह में महिला शिक्षकों को दुल्हन को सजाने की जिम्मेदारी दे दी गई. 

सिद्धार्थ नगर: 

उत्तर प्रदेश में अभी तक शिक्षकों की जनगणना और चुनावों जैसे कार्यक्रमों में ड्यूटी की बात हम सुनते आये हैं लेकिन मंगलवार को होने वाले सामूहिक विवाह में महिला शिक्षकों को दुल्हन को सजाने की जिम्मेदारी दी गई, बाद में मामला सुर्ख़ियों में आने के बाद विरोध की भनक लगते ही बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. सूर्यकांत त्रिपाठी ने बीईओ का आदेश निरस्त कर दिया। पूरा मामला बेसिक शिक्षा मंत्री डॉ सतीष चन्द्र द्विवेदी के गृह जनपद सिद्धार्थ नगर का है.

सिद्धार्थ नगर जिले के नौगढ़ ब्लाक में मंगलवार को होने वाले मुख्यमंत्री विवाह समारोह में 184 दुल्हनों को सजाने की जिम्मेदारी 20 महिला शिक्षकों दी गई थी. यहां के खंड शिक्षा अधिकारी ध्रुव प्रसाद ने एक तुगलकी फरमान जारी करते हुए तेतरी बजार में होने वाले सामूहिक विवाह में सजाने की जिम्मेदारी सौंप दी.

कितने दुःख की बात है कि जहाँ हमारे देश में विद्यार्थियों/शिक्षकों का अनुपात 24:1  है , मतलब प्रत्येक 24 विद्यार्थियों पर केवल 1 शिक्षक है जो की एशिया क्षेत्र में 8 देशों के रिसर्च में सबसे बुरा है , वहीं शिक्षकों को स्कूलों में शिक्षा देने और शिक्षा की गुणवत्ता सुधरने के बजाये कभी चुनाव/जनगणना/पोलियो/टीकाकरण में और अब सामूहिक विवाह में दुलहनों को सजाने में उनकी ड्यूटी लगाई जाती है , सरकारों/नेताओं को इस पर गंभीरता से ध्यान देने की। 

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