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भारत में पिछले 24 घंटे में कोविड 19 नोवेल कोरोना वाइरस के लगभग  15400 नए केस पाये गये हैं

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भारत में पिछले 24 घंटे में कोविड 19 नोवेल कोरोना वाइरस के लगभग  15400 नए केस पाये गये हैं एवं लगभग 306 लोगों की कोरोना वाइरस से मृत्यु हुई है। यह भारत में पैर पसारते हुए कोरोना वाइरस की भयावह स्थिति को दिखाता है जिस पर देश की सरकारों/जनता को भी और गंभीर/जिम्मेदार/सतर्क होने की अतिआवश्यकता है।   

चीन में कोरोना वायरस से 213 की मौत, WHO ने घोषित की इंटरनेशनल इमर्जेंसी

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कोरोना वायरस से अब तक चीन में 213 लोगों की जान जा चुकी है। इसे देखते हुए देखते विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इंटरनेशनल इमर्जेंसी घोषित कर दी है। हालांकि, केरल में कोरोना वायरस से ग्रस्‍त पाए गए पहले शख्‍स को त्रिशूर जनरल हॉस्पिटल से त्रिशूर मेडिकल कॉलेज के अलग वॉर्ड में शिफ्ट किया गया। वहीं, चीन से भारतीय लोगों को निकालने के लिए आज वुहान के लिए एयर इंडिया का विमान रवाना होगा।

चीन में कोरोना वायरस से मरने वाले लोगों की संख्‍या प्रतिदिन बढ़ रही है। वहां अब तक लगभग 8000 लोग इस जानलेवा वायरस की चपेट में आ चुके हैं। यह वायरस बहुत तेजी से बढ़ रहा  है, और यह अभी तक दुनिया के 18 देशों को अपनी गिरफ्त में ले चुका है। इसी के चलते डब्‍ल्‍यूएचओ ने इसे अंतरराष्‍ट्रीय आपदा घोषित कर दिया है। सबसे बड़ी परेशानी यह है कि अभी तक इस वायरस का इलाज नहीं तलाशा गया है। बता दें कि चीन के वुहान से कोरोना वायरस फैला है। भारत में कोरोना वायरस का पहला मामला केरल में सामने आया है।

डब्‍ल्‍यूएचओ ने गुरुवार को कोरोना वायरस को अंतरराष्‍ट्रीय आपदा घोषित कर दिया। इसका मकसद वायरस से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समन्वय बैठाया जा सके। अब भारत समेत कई देश इस वायरस का इलाज मिलकर ढूंढ सकेंगे। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुखिया टेड्रोस ऐडनम ने बताया है कि सबसे बड़ी चिंता ऐसे देशों में वायरस को फैलने से रोकने की है जहां स्वास्थ्य व्यवस्थाएं कमजोर हैं। अंतरराष्‍ट्रीय आपदा घोषित होने के बाद अब इन देशों को कोरोना वायरस से लड़ने के लिए अंतरराष्‍ट्रीय मदद मिल सकेगी।

इसी कारण से दुनिया भर के देशों और उनकी जनता को जलवायु परिवर्तन पर, प्रदूषण न करने , और पर्यावरण व अपने गृह को बचाने और स्वस्थ रखने की जरुरत है , क्योंकि कहीं न कहीं बिना मौसम बरसात, आंधी, तूफ़ान , शैलाब , अत्यधिक गर्मी, अत्याधिक सर्दी , सूखा पड़ना , बाढ़ आना , अत्यधिक बर्फ़बारी , चक्रवात , सुनामी आदि आपदाएं या डेंगू , मलेरिया , टाइफाइड , कैंसर , स्वाइन फ्लू, और अब ये कोरोना वायरस जैसी महामारी प्राकृतिक जलवायु परिवर्तन या इंसान द्वारा किये जा रहे जलवायु परिवर्तन की वजह से ही आती हैं/फ़ैल रही है। 

 

#HowToProtectFromCoronaVirusWHOguidelines

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WHO’s standard recommendations for the general public to reduce exposure to and transmission of a range of illnesses are as follows, which include hand and respiratory hygiene, and safe food practices:

  • Frequently clean hands by using alcohol-based hand rub or soap and water;
  • When coughing and sneezing cover mouth and nose with flexed elbow or tissue – throw tissue away immediately and wash hands;
  • Avoid close contact with anyone who has fever and cough;
  • If you have fever, cough and difficulty breathing seek medical care early and share previous travel history with your health care provider;
  • When visiting live markets in areas currently experiencing cases of novel coronavirus, avoid direct unprotected contact with live animals and surfaces in contact with animals;
  • The consumption of raw or undercooked animal products should be avoided. Raw meat, milk or animal organs should be handled with care, to avoid cross-contamination with uncooked foods, as per good food safety practices.

अब दिल्ली में भी कोरोनावायरस की आहट!

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नई दिल्ली.  चीन के कोरोनावायरस ने अमेरिका के साथ साथ एक दर्जन देशों में भी अपनी आहट कर दी है। 

दुनिया के सभी देश इसका इलाज करने की कोशिश में लगे हैं. भारत में भी कोरोनावायरस के कुछ संदिग्ध मामले सामने आए हैं. राजधानी दिल्ली में तीन मामले सामने आने की खबर है. कोरोनावायरस के तीन संदिग्ध मामले में राजधानी दिल्ली स्थित राम मनोहर लोहिया अस्पताल  में सामने आए हैं. इन तीन लोगों के सैंपल जांच के लिए नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल को भेज दिए गए हैं.

आरएमएल अस्पताल में चिकित्सा अधीक्षक डॉ. मीनाक्षी भारद्वाज ने बताया कि तीनों लोगों की उम्र 24 से 48 साल के बीच है. उन्हें सोमवार को अस्पताल में भर्ती करवाया गया था और उनके नमूनों को परीक्षण के लिए भेजा गया है. इनमें से दो व्यक्ति दिल्ली के निवासी हैं और एक राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से है.

इससे पहले रविवार को जयपुर में कोरानावायरस का एक संदिग्ध मरीज सामने आया है. बताया जा रहा है कि जयपुर के सरकारी अस्पताल में भर्ती कोरोनावायरस से पीड़ित लड़का चीन में मेडिकल की पढ़ाई कर रहा था. भारत आने के बाद उसमें कोरोनावायरस के लक्षण देखने को मिले, जिसके बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया. वहीं चीन में कोरोनावायरस से मरने वालों की संख्या बढ़कर 106 हो गई है.

कोरोना वायरस: यूपी और बिहार में भी आहट, पांच और संदिग्ध संक्रमित मिले

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चीन में फैल रहा जानलेवा 2019-एनसीओवी कोरोना वायरस से अब तक 80 मौतें हो चुकी है। 11 देशों में दशहत फैला चुके इस वायरस की आहट उत्तरप्रदेश और बिहार तक भी पहुंच गई है। बिहार में चार और उत्तर प्रदेश में एक संदिग्ध संक्रमित मिला है। इससे पहले केरल, महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और राजस्थान में पहले ही संदिग्ध संक्रमित मिल चुके हैं। 

बिहार और उत्तर प्रदेश में नए मामले सामने पर केंद्र सरकार की चिंता बढ़ गई है। सभी राज्यों में अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। सोमवार को केंद्रीय कैबिनेट सचिव ने सभी मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की। हवाईअड्डों पर जांच के साथ अब जहाजरानी मंत्रालय उन अंतरराष्ट्रीय बंदरगाहों पर लोगों की जांच आरंभ करेगा जहां चीन से लोग आते हैं। 

चीन में बिहार के 800 लोग, चार संदिग्ध संक्रमित  

बिहार से कोरोना वायरस के चार संदिग्ध मरीज मिले हैं। इनमें चीन से 22 जनवरी को लौटी सारण जिले की मेडिकल छात्रा भी शामिल है। चीन के तिआन्जिन प्रांत से छपरा आई शोध छात्रा को पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल के एकांत वार्ड में भर्ती कराया गया है। इसके अलावा दो संदिग्ध सीतामढ़ी और एक मुजफ्फरपुर का निवासी है। मुजफ्फरपुर निवासी संदिग्ध का चीन से लौटने के बाद दिल्ली में इलाज चल रहा है। वहीं, सीतामढ़ी निवासी एक अन्य मरीज अभी चीन में ही है। चीन में शिक्षा, रोजगार व अन्य क्षेत्रों से जुड़े बिहार के करीब 800 लोग रह रहे हैं। इनमें करीब छह सौ मेडिकल के छात्र शामिल हैं।

यूपी के महराजगंज में चीन से लौटा छात्र भर्ती  

चीन से महराजगंज के एक छात्र की घर वापसी के बाद शनिवार देर रात अधिकारी जांच के लिए उसे जिला अस्पताल ले आए। उसे एकांत वार्ड में निगरानी में रखा गया है। लक्ष्मीपुर निवासी आसिफ चीन में मेडिकल की पढ़ाई कर रहा है। वह परीक्षा के बाद एक महीने की छुट्टी पर 14 जनवरी को घर आया था। स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि संक्रमण की स्थिति जांच के बाद ही साफ होगी।   

उत्तराखंड का स्वास्थ्य महकमा अलर्ट पर 

उत्तराखंड स्वास्थ्य विभाग ने सोमवार को प्रदेश के सभी जिलों में मेडिकल टीम भेज दी है जो खासतौर पर चीन और नेपाल से आने वाले लोगों की स्क्रीनिंग करेगी। प्रदेश की महानिदेशक (स्वास्थ्य) अमिता उप्रेती ने कहा, चीन और नेपाल की सीमा से सटे जिलों चंपावत, चमोली और पिथौरागढ़ में स्क्रीनिंग शुरू कर दी गई है।

जेके लोन सरकारी अस्पताल में 35 दिन से अब तक 107 नवजात बच्चे अपना दम तोड़ चुके हैं। 

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कोटा. जेके लोन सरकारी अस्पताल में 35 दिन से नवजातों की मौतों का सिलसिला जारी है। अब तक 107 बच्चे दम तोड़ चुके हैं। बातचीत में पता चला कि डॉक्टरों की लापरवाही और चिकित्सा उपकरणों की कमी के कारण कई परिवारों की खुशियां छिन गईं। ऐसा ही एक परिवार है कोटा के दीनदयाल योगी और तुलसी बाई का। जिनके घर 7 साल मन्नतें करने के बाद पोता हुआ था, जो 24 घंटे भी जिंदा नहीं रह सका।पीड़ित परिवारों को कहना है कि कोई मिलने नहीं पहुंचापीड़ित परिवारों ने बताया कि बच्चों की मौत के 10-15 दिन बीतने के बाद भी आज तक कोई उनसे मिलने नहीं पहुंचा। मीडिया में खबरें आने के बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला और उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट यहां पहुंचे थे। इससे पहले न किसी ने खबर ली। न ही किसी तरह के मुआवजे की बात की गई।केस 1कोटा की किशोर सागर कॉलोनी में रहने वाली तुलसी बाई ने बताया- 17 दिसंबर को बहू पूजा को जेके लोन अस्पताल में डिलीवरी के लिए भर्ती कराया था। पूजा ने 18 तारीख की रात बेटे को जन्म दिया तो घर में खुशी छा गई। इसके लिए परिवार ने 7 साल तक मन्नतें, झाड़फूंक और भगवान से गुहार लगाई थी। लेकिन अगले ही दिन सुबह बच्चे की तबीयत बिगड़ी। उसे सांस लेने में तकलीफ हुई थी। अस्पताल में मशीनों की कमी के कारण उसने दम तोड़ दिया। बच्चे की मौत की खबर सुनकर पूजा की तबीयत खराब हो गई। उसका ब्लड प्रेशर बढ़ गया। हमने उसे मायके भेज दिया ताकि वह सदमे से बाहर आ सके।पूरी रात ऑक्सीजन पंप को हाथ से दबाती रहीदादी तुलसी बाई ने कहा कि मेरे पोते के साथ वार्ड में दूसरा लड़का भी था, डॉक्टरों ने जिसे मशीन में रखा था। वो जिंदा भी है लेकिन मुझे पंप दे दिया। मैं पूरी रात बच्चे को सांस दिलाने के लिए पंप दबाती रही। सुबह जब हमने ऑक्सीजन सिलेंडर लगाने के लिए कहा तो डॉक्टर ने बच्चे को जांच कर कहा कि इसे ले जाओ। ये तो खत्म हो गया। बच्चे के दादा दीनदयाल ने कहा कि सरकार से कहना चाहता हूं कि मेरा पोता तो गया। आने वाले जो हैं उनकी गोद सूनी नहीं हो। मशीनें खराब पड़ी हैं, उन्हें सही कराएं।केस 2कोटा के प्रेम नगर में रहने वाले किशन चौधरी की पत्नी पूजा की डॉक्टरों ने 6 महीने में ही डिलिवरी करा दी। नतीजा ये रहा कि उनकी बच्ची 3 घंटे भी जिंदा नहीं रहा। करीब 15 दिन पहले हुए घटनाक्रम के बाद कोई भी परिवार की सुध लेने नहीं पहुंचा। शनिवार को सांसद ओम बिड़ला उनके घर पहुंचे तो परिवार की पीड़ा सामने आई। बच्ची के दादा राजू चौधरी के मुताबिक, करीब 15 दिन पहले बहू पूजा के पेट में दर्द हुआ। जिसके बाद हम उसे रात 12 अस्पताल लेकर गए थे। उस वक्त बच्चा सिर्फ 6 महीने का था। डॉक्टर ने दो इंजेक्शन लगा दिए। जिसके बाद भी दर्द ठीक नहीं हुआ। फिर सुबह 4.30 बजे डिलिवरी हो गई। डॉक्टरों की लापरवाही से बच्ची की मौत हुई।केस 3 कोटा की सतीश विहार कॉलोनी में रहने वाले आसिम हुसैन ने बताया कि 15 दिसंबर को पत्नी रुखसार बानो ने बेटी को जन्म दिया था। इतनी सर्दी के बाद भी अगले दिन छुट्टी कर दी गई। 29 दिसंबर को तबीयत खराब होने पर उसे अस्पताल लेकर पहुंचे थे। उसे बस थोड़ा बुखार था। ऑक्सीजन देने के लिए उसे वेंटिलेटर पर रखा गया था। एक डॉक्टर रात को शराब पीकर आया था। मां रुखसार ने कहा कि हमारे बेटी को लेकर बहुत अरमान थे। घर में खुशी की कोई हद नहीं थी। मेरे साथ जैसा हुआ है किसी के साथ भी न हो। 1 जनवरी 2020 को हमारी शादी की पहली सालगिरह थी। लेकिन 3 दिन पहले ही बेटी दुनिया को अलविदा कह गई।केस 4 कोटा की बड़ा बस्ती इलाके में रहने वाली एक महिला की बेटी टोली को बेटा हुआ था। बच्चे की मौत के बाद उसे इतना गहरा सदमा लगा कि वो जन्म की तारीख ही भुल गई। महिला ने बताया कि अस्पताल में कर्मचारी गाली देकर बात करते थे। अस्पताल के कर्मचारियों को बच्चे का इलाज करना चाहिए। इस परिवार के पास लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला भी पहुंचे। जिन्होंने 15 हजार की आर्थिक मदद दी है।केस 5कोटा शहर के संजय रावल की पत्नी पद्मा ने बेटे को जन्म दिया था। जिनके घर दो बेटियों के बाद बेटा हुआ था। रावल ने बताया कि बच्चे को निमोनिया की शिकायत थी। कर्मचारी ड्रिप लगाकर चाय पीने चले जाते थे। वहां बैठकर हंसी-मजाक करते रहे थे। दूध तो पिलाने के लिए पहले ही मना कर दिया था। ओआरएस पिलाने के लिए भी पूछने पर भी चिल्लाते थे। अगर हम कुछ कहते थे तो बोलते थे कि तुम्हारा बच्चा अभी मर नहीं रहा है।

राजस्थान के कोटा शहर में एक सरकारी अस्पताल में एक ही महीने दिसंबर में 100 नवजात शिशुओं की मौत

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कोटा, राजस्थान: राजस्थान के कोटा शहर में एक सरकारी अस्पताल में 100 नवजात शिशुओं की मौत को संबोधित करते हुए, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने आज कहा कि चौंकाने वाली बात यह है कि वास्तव में यह एक सुधार है जो पिछली भाजपा सरकार ने उसी अस्पताल में दर्ज की थी। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने आज अविनाश पांडे, जो राजस्थान कांग्रेस के प्रमुख हैं, के साथ त्रासदी पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि श्रीमती गांधी "परेशान" हैं और "मौतों का कारण जानना चाहती हैं"। राज्य सरकार ने अपनी रिपोर्ट में स्वीकार किया कि नवजात शिशुओं के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले अस्पताल में कुछ इनक्यूबेटर उचित काम करने की स्थिति में नहीं थे।इस मामले की जांच के लिए 27 दिसंबर को अस्पताल का दौरा करने वाले सचिव चिकित्सा शिक्षा और वरिष्ठ डॉक्टरों की अगुवाई वाली समिति ने यह भी बताया कि अत्यधिक ठंड ने शिशुओं के लिए मुश्किल खड़ी कर दी है, जो पहले से ही अपने जीवन के लिए लड़ रहे हैं, अपनी बीमारियों से बचे हुए हैं।मरने वाले सभी शिशुओं को गहन चिकित्सा इकाई में भर्ती कराया गया था। तीन बच्चों की टीम का नेतृत्व करने वाले चिकित्सा शिक्षा सचिव वैभव गलेरिया ने कहा कि ज्यादातर बच्चों को गंभीर हालत में अस्पताल लाया गया था।राज्य की राजधानी जयपुर से कोटा का अस्पताल लगभग 250 किलोमीटर दूर है। मुख्यमंत्री गहलोत ने आज ट्वीट किया: "कोटा के जेके लोन अस्पताल में बच्चे के हताहत होने के बारे में सरकार के आंकड़े बताते हैं कि इस वर्ष 2015 में 1260 से घटकर 963 और 2016 में 1193 हो गया जब राज्य में भाजपा का शासन था। 2018 में, 1005 बच्चों ने यहाँ अपनी जान गंवाई। 27 दिसंबर को, राज्य के चिकित्सा शिक्षा सचिव के नेतृत्व में टीम ने नवजात इकाई के ऊष्मायन इकाई में पाया कि इकाइयां ठीक से काम नहीं कर रही थीं, और अस्पताल ने कमी के कारण दो शिशुओं को एक इनक्यूबेटर में रखा।राजस्थान के स्वास्थ्य मंत्री रघु शर्मा ने कहा, "हम इस बात से दुखी हैं, हमारी जिम्मेदारी नैदानिक सहायता देने की है। कई बच्चों को गंभीर बीमारियों के साथ लाया गया था। भाजपा चाहे तो ऑडिट कर सकती है। हमने उन सभी बच्चों को बचा लिया, जिन्हें बचाने की स्थिति में थे।। बच्चों की मौत केवल एक कारक के कारण नहीं हुई है। अत्यधिक ठंड का मौसम शायद मौतों में अचानक स्पाइक का एक अतिरिक्त कारण है क्योंकि अत्यधिक मौसम नव-नातल को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करता है, विशेष रूप से वे जो कम जन्म के वजन वाले होते हैं, मुख्यमंत्री द्वारा नियुक्त तीन सदस्यीय समिति कि रिपोर्ट पढ़ें । कांग्रेस सरकार योगी आदित्यनाथ और मायावती जैसे राजनीतिक विरोधियों से कोटा त्रासदी पर हमला झेल रही है.राज्य को सभी समर्थन का आश्वासन देते हुए, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने कहा कि केंद्र एक उच्च स्तरीय टीम भेज रहा है जिसमें एम्स जोधपुर के विशेषज्ञ शामिल होंगे। यह कल #Kota तक पहुंच जाएगा," उन्होंने ट्वीट किया। हालांकि, उन्होंने कहा कि मृत्यु की संख्या "निश्चित रूप से पिछले कुछ वर्षों की तुलना में इस बार अधिक है"।मुख्यमंत्री गहलोत ने ट्वीट किया: "मैंने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री @drshvardhan जी को फोन किया और उनसे व्यक्तिगत रूप से # कोटा आने का अनुरोध किया ताकि वे राज्य स्वास्थ्य विभाग द्वारा सुविधाओं और समुचित प्रबंधन का सर्वश्रेष्ठ देख सकें और खुद को तथ्यों से अवगत करा सकें। 

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