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गोंडा:उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में 2 नाबालिग सगी बहनों के साथ सामूहिक दुष्कर्म

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गोंडा. उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में 2 नाबालिग सगी बहनों के साथ सामूहिक दुष्कर्म का मामला उजागर हुआ है , घटना के बाद युवकों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है और पीड़ित बहनों की मेडिकल जांच कराई जा रही है.

गोंडा में देहात कोतवाली क्षेत्र का ये पूरा मामला है, आरोप यह है कि गांव में दो सगी बहनों के साथ गांव के ही दो युवकों ने सामूहिक बलात्कार की घटना को अंजाम दिया. जब लड़कियों ने अपने घर में पुरे मामले की जानकारी दी तो परिजनों ने देहात कोतवाली में शिकायत दर्ज कराइ . पुलिस ने पीड़ित परिजनों की तहरीर पर 376 और पॉक्सो के तहत केस दर्ज कर लिया है. घटना के बाद गांव में आक्रोश व्याप्त है. ग्रामीणों ने मामले में एक आरोपी को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया. इसके बाद पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए दूसरे आरोपी को भी दबोच लिया है. दोनों पीड़ित लड़कियों की मेडिकल जांच के लिए अस्पताल भेज दिया गया है.

कितना दुखदाई है की हमारे देश भारत में हर १४ मिनट में एक बलात्कार होता है और इसे रोकने/कम करने में सरकार और समाज के लोग विफल हैं क्योंकि उनका ध्यान इस बुराई पर है ही नहीं और ना ही इसे गंभीरता से लिया जाता है , लगता है सरकारों/समाज के लोगों को जैसे इस बीमारी की आदत हो चुकी है। 

बलात्कार शुरू होता है महिला का सम्मान ना करने से, जो की समाज के पुरुष बात -बात में महिला (माँ /बहन /बेटी ) के नाम पर भद्दी गलियां देकर करते हैं। अगर हमे बलात्कार जैसी समाज से ख़त्म करना है तो सबसे पहले महिला का समाज सीखना/करना होगा। 

समाज की सभी महिलाओं को अपने अपने घरों में और बहार भी पुरुषों को महिला के नाम पर बात बात में भद्दी गालयों का उपयोग करके महिलाओं का अपमान करने से रोकना चाहिए, और बलात्कार जैसी बुराई को ख़त्म/कम करने में अपना सहयोग देना चाहिए. 

समाज की महिलाओं को अपने घरों में पुरुषों को प्यार से या अपनी ताकत से समझाना होगा की अब उनके घरों में या तो वह (महिला) रह सकती है या उनका (महिलाओं) बात बात  होने वाला अपमान। 

एक तरफ तो हम अपनी भारतीय संस्कृति में महिला को माँ/देवी/जननी/प्रकृति का दर्जा देते हैं , वहीँ दूसरी तरफ में हर 14 मिनट में किसी ना किसी महिला बलात्कार हो जाना हमारे लिए बहुत शर्म की बात है , आज देश की सरकार/समाज के लिए अगर सबसे बड़ा कोई विषय काम करने के लिए होना चाहिए तो वह है बलात्कार/कम करना , क्योंकि अगर हमारे घर /समाज की महिलाएं ही सुरक्षित  के सभी विकास कार्य सभी व्यर्थ हैं , हमें कभी सोचकर देखना चाहिए की ईश्वर न करें किसी दिन हमारे घर की किसी महिला के साथ घिनोना अपराध हो उस दिन  हमारे लिए इस पूरी दुनियां की सभी चीजें व्यर्थ हो जाएँगी। 

हम देश की सरकरों से भी प्रार्थना  करते हैं कि समाज के लोगों को महिला का सम्मान करना सिखाने के लिए महिलाओं के नाम पर  भद्दी गलियों के उपयोग को रोकना होगा , और इसे भी एक संगीन अपराध घोषित करना होगा। 

साथ ही साथ हम देश के अलग अलग क्षेत्र  कलाकारों, सिनेमा जगत के लोगों से  प्रार्थना करते हैं कि वे अपनी किसी भी रचना में महिलाओं के नाम पर भद्दी गलियों और उनके अपमान को प्रमोट न करें। 

हमारे भारत महान में लगभग हर 15  मिनट में 1 बलात्कार हो रहा है, प्रतिदिन लगभग 100, प्रति महीना लगभग 3000 , और प्रति वर्ष लगभग 36000 या उससे अधिक बलात्कार । यहाँ तक कि हमारे भारत महान की राजधानी दिल्ली में ही प्रतिदिन लगभग 5 बलात्कार हो रहे हैं। हमारा भारत महान दुनिया भर में महिलाओं के खिलाफ अपराध (बलात्कार, यौन शोषण, छेड़छाड़, महिला तस्करी, जबरदस्ती मजदूरी कराना  , घरेलु हिंसा ) को लेकर शीर्ष पर है , और इस तरह से यह महिलाओं के रहने के लिए दुनिया का सबसे खतरनाक देश बन चुका है।

हमारी सरकारें क्यों सोई हुई हैं? हमेशा बलात्कार हो जाने के बाद ही उस पर कार्यवाही क्यों होती है और  दोषियों को पकड़ा जाता है? बलात्कार होने से पहले उस बलात्कार को रोकने के लिए क्यों काम नहीं होता, क्यों उसे रोका नहीं जाता? अगर पुलिस/आर्मी  बड़े बड़े अपराधियों को जाल बिछाकर पकड़ सकती है , तो क्या जाल बिछाकर महिलाओं को शिकार बनाने वाले अपराधियों को नहीं पकड़ा जा सकता ? कैसे किसी की हिम्मत हो सकती है हमारे घर की महिलाओं को छेड़ने, अपहरण करने, बलात्कार करने, और जलाकर, या फांसी देकर, या पीटकर मार देने की ? क्या अपराधियों के दिमाग में कानून का जरा भी डर नहीं है? जो डर हमारे भीतर अपने घर की महिलाओं को घर से बाहर भेजते हुए होता है वह डर हमारे भीतर नहीं बल्कि अपराधियों के भीतर होना चाहिए।

लेकिन क्या बलात्कार को रोकने/कम करने की जिम्मेदारी सिर्फ सरकार/पुलिस की है? नहीं। बलात्कार को न तो केवल सरकार द्वारा रोका जा सकता है और न ही समाज के नागरिकों द्वारा, इसे केवल दोनों के संयुक्त प्रयासों से रोका जा सकता है । 

हम सभी को अगर समाज में बलात्कार को सचमुच खत्म करना है या कम करना है तो इसके लिए हमें सख्त क़ानून व्यवस्था, और उसका जमीनी स्तर पर अच्छे से लागू और पालन होने की मांग के साथ साथ इसके असली कारण उस  बलात्कारी सोच/विचार पर भी काम करना होगा , उसे ख़त्म/परिवर्तित करना होगा, और यह संभव है केवल यदि हम सभी सरकार,और स्कूलों से मांग करें कि वो बच्चों के पाठयक्रम में यौन शिक्षा (Sex Education ), योग (Yoga जो हमें शारीरिक रूप से स्वस्थ/मजबूत बनाता है) , ध्यान (Meditation जो हमें मानसिक रूप से स्वस्थ/मजबूत बनाता है, हमारे भीतर से सभी नकारात्मक विचारों को ख़त्म /परिवर्तित करके सकरात्मक विचारों को जन्म देता है, और हमारे विचारों में सात्विकता, शुद्धता, और पवित्रता लाता है) , आत्मरक्षा शिक्षा (Self Defence Education जो हमें किसी भी परिस्थिति में हमारी रक्षा करने में सक्षम बनाती है), और सामाजिक/नैतिक शिक्षा (Social/Moral Education जो हमें समाज में किस तरह का अपना व्यवहार, आचरण रखना है , किस तरह अपने से बड़ों से , महिलाओं से, बच्चों से व्यवहार करना है, महिलाओं का सम्मान, माँ बहन के नाम पर भद्दी गलियां ना देना आदि सिखाती है) आदि को शामिल करें, और हमें घर पर भी अपने बच्चों , और परिवार के बाकि सदस्यों को इन सभी शिक्षाओं को ग्रहण करने और पालन करने के लिए बोलें, यहां तक ​​कि जेलों में भी अपराधियों को ऐसी शिक्षा प्रदान करने के लिए बोलें ताकि वे एक अच्छे इंसान के रूप में परिवर्तित हो सकें।

हम सभी को समझना पड़ेगा बलात्कारी कोई पुरुष/महिला नहीं हैं, बलात्कारी एक विचार है जो लगभग हम सभी के भीतर मौजूद है ,और अवसर पाने पर यह बलात्कारी विचार हममें से किसी के भी भीतर भी पैदा हो सकता है और उसके चलते हममें से कोई भी बलात्कार कर सकता है, जिसने समय पर उस बलात्कारी विचार को पहचान लिया और उस पर जीत हांसिल कर ली वो बलात्कारी होने से बच जाता है , और जो ऐसा करने में असमर्थ रहा और उस बलात्कारी विचार को अपने ऊपर हावी होने दिया वो बलात्कारी बन बैठता है।  

देश/समाज के लोगों को ध्यान (मैडिटेशन) अवश्य ही करना चाहिए क्योंकि यह इंसान के भीतर की बुराइओं/बुरे विचारों/नकारात्मक विचारों  खत्म/कम करके  को अच्छाई/अच्छे विचारों/सकारत्मक विचारों/और सात्विकता से भर देता है, जिससे वह हर इंसान/जीव में ईश्वर को देखता  केवल महिला तो क्या  हर इंसान/जीव का भरपूर सम्मान करता है। 

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